हम तुम्हारा प्यार हैं,या तुम हमारा प्यार हो...(Poetry)

हम तुम्हारा प्यार हैं,या तुम हमारा प्यार हो...
हम किनारा नाव का या तुम कोई मझधार हो....
बिखेर आभा प्रदीप्त कर,तुम तो जग का सार हो....

इस शिथिल देहस्थूल का तुम तो बस संचार हो....
ना तो कोई प्रेम हो,ना तो कोई गात हो,इस गतिज इंदृत्व का तुम तो बस विचार हो....✍️
                         ~उदय'अपराजित💥💜
(गतिज इंदृत्व=दिमाग)


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