अब मैं तुम्हें वहां मिलूंगा...जब तुम हीर बनके आओगी...(Poetry)

अब मैं तुम्हें वहां मिलूंगा...
जब तुम हीर बनके आओगी...
बालों में गजरे के साथ....

तुम मुझे पा पाओगी अब देवदास की गलियों में...
पर देख न सकोगी....
मैं तभी दिखूंगा तुम्हें...
जब तुम पारो की नजरों से देखोगी मुझे....

मैं रहूंगा संजय खान के किरदार में कोई "अमर" रूप,जब तक तुम प्रतीक्षित रहोगी किसी "सोमना" की भांति,साधना शिवदासिनी के रूप में.....
तब हम मिलेंगे,किसी दूसरी दुनिया में....
किसी दूसरी "एक फूल,दो माली" लिखने को...


मैं मस्त होऊंगा किसी कृष्ण धुन में...
तुम मीरा बनकर आओगी जब उसी धुन में सामने...
हम तब मिलेंगे....
पर निश्चिंत रहना तुम...
क्योंकि तब निश्चित ही मिलेंगे....
                                               ~उदय'अपराजित

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