तुम्हें पता है...तुम्हारे जाने के बाद मैंने क्या किया...?

तुम्हें पता है...
तुम्हारे जाने के बाद मैंने क्या किया...?
वास्तव में प्रश्न यह होना चाहिए कि मैने क्या-क्या किया...?
खैर...
तुम्हारे जाने के बाद मैने...
बर्तन मांजे, रसोई साफ की...
कमरा व्यवस्थित किया...जो चीज जहां से उठाई वहीं रख दी...

तुम्हारी मेरे साथ खींची हुई तस्वीरें देखी...
खासकर कि आखिरी वक्त की, रेलवे स्टेशन की, रेलगाड़ी के साथ की, मेट्रो की...
हर वो चीज खंगाली जो जो उस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे...
कुछ थोड़ा बहुत खाया, कविताएं लिखीं....
फिर तुम्हें सुनाई...
वैसे कविताएं सोची पहले...
बर्तन धुलते हुए, दूध गरम करते हुए...
बिस्तर बनाते हुए, इधर उधर पड़े सामान को उनकी अपनी जगह रखते हुए...
कमरे भर में बिथरे पड़े तुम्हारे बाल, मेज पर रखी गई तुम्हारी दी हुई नमकीन, चलते चलते याद दिलाना भी कि दिखेगी तो खाओगे..
उसे रखी रहने दी उनकी अपनी जगह, बावजूद कि वो उनकी जगह न रही कभी ही....

बर्तन मांजते हुए कविताएं सोचना इस बात का परिचायक कत्तई नहीं है कि अब काम हमे खुद करना होगा...
बल्कि हम खुद कर रहे थे आहिस्ता आहिस्ता समय जल्दी न व्यतीत होने को...
उससे भी समय न खर्च हुआ तो फिर से लिखी कविता, बढ़ाई कविता, श्रृंगारित की कविता...
वियोग से, पीड़ा से, प्रेम प्रलाप को किया मृदुल, विलाप को किया मधुर, बनाया अपने आंसुओं को मोतियों की सीप, और छांप दी श्वेत सुनहरे अक्षरों में...
लिखते रहे....किन्तु पूर्ण विराम नहीं लगाया...
जब भी छोड़ी, अल्प विराम के साथ छोड़ी...
तुम्हें पता है न?
तुम्हारे जाने के बाद मैंने क्या क्या नहीं किया...
खैर....
तुम्हें पता है ना ❤️

@उदय'अपराजित🥀❣️

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