Not any Dream,Only Target...
EconomicalEngineer'23
University of Lucknow👨🎓
Author:Economy,GeoPolitics,International Relⁿs,Religiology,Spirituality,Indianism,Governance & Love❣️
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तू मां दुर्गे की पुत्री है,या साक्षात शारदे तू तू इस जग की तारण हारी,प्रति क्षण में ही वार दे तू... युद्ध में जाते हर क्षत्रप की छुपी हुई तलवार है तू... सब कुछ पाने वाले खिलजी की अद्भुत हार है तू... रामायण का अंश ही नहीं,गीता का भी सार है तू... उन्नत होते दुष्ट दानवों का करती उद्धार है तू... पद्मावती का तू अवतार है,कर्ण का वंचित तू संसार है... उपनिषदों की विद्या है,है घर घर की लक्ष्मी तू... और सदी इक्कीस(21) की तू स्वराज है,है सन् इकहत्तर(71) की तू इंदिरा.. इन्हे मिटाने जो आया, अंत में वो है सदा गिरा... और नारी शक्ति अटल अमर है, गहराई इसकी अथाह.. मत ललकारो नारी शक्ति को मत रोको उसका प्रवाह... ये जो कहते हैं तुझे किंचित, ये जो रखते हैं तुझे वंचित... तू बन जवाब इस बाध्य रूप का तू बन जवाब इस असाध्य सोच का... महाभारत की द्रौपदि मत बन...,बन सत्तावन(57) की लक्ष्मीबाई... जिसके तलवार/कृपान/असि की खनखन आहट, सदियों तक भी रहे सुनाई... नारी से ही दुनिया है या हर दुनिया में नारी है.. और त्याग,तपस्या, सह-सम्मान बस,यह हम सब की ही जिम्मेदारी है... और सशक्त नारी है तू अब,तू बस गौरवान्वित नारी बन.....
1.मुझे तुमसे प्रेम नहीं है...hnn.. मुझे तुमसे प्रेम नहीं है!!! मुझे उससे प्रेम है,जो हमारे हृदय में रहता है।। और हां तुम हमारे हृदय में रहती हो...✍️❣️ ~उदय'अपराजित 2.सुनो, जब तुम चेहरा मासूमियत वाला बनाती हो,तो और भी ज्यादा शरारती लगती हो... जब तुम बालों में सफेद पट्टे वाला हैरबैंड लगाती हो... एकदम दिव्य भारती लगती हो...✍️🌝 ~उदय❣️ 3. अक्सर ही पूछती है,आखिर किसको सोचकर लिख लेते हो तुम ये इतनी गहरी कविताएं... मैं हमेशा ही उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा देता हूं हमेशा की तरह...✍️ ~उदय'अपराजित💥 वो अक्सर ही पूछती है,आखिर किसको सोचकर लिख लेते हो तुम ये इ...
यह भारत है अटल कलाम का,क्या चिनपिंग और क्या इमरान(सुन लो चाइना के हुक्मरान).... यह धरती है,अभिमन्यु कर्ण की,तुम हो कुछ दिन के मेहमान.... गर भला बंधूता चाहते हो तो आ जाओ, हैं खुले हांथ... जगह ना पाओगे भू जल में,यदि धारण कर लिए ब्रह्मास्त्र... इर्श द्वेष तजकर आओगे,रहोगे सदा तुम स्मरणिय... गर दूषित सोच रखोगे भारत प्रति,होगा फिर यह अति विचारणीय... जब तक इस दुनिया में उदय,उदय मै प्राण शेष, आर्यावर्त पर आंच ना आने दूं,सुन लो अब तुम समस्त देश... गर भूल रहे हो तो बतला दूं,ये है हरिश्चंद्र की वसुन्धरा.... तिरछी आंख करी जिसने,अंत में वो है सदा मरा... ये प्रथ्विराज,राणा प्रताप के तेज से लिप्त ये धरती है... भगतसिंह चंद्रशेखर के रक्त से सजी यह मिट्टी है.... पुरुषार्थ भरा है कण क़ण में,इतिहास भरा है क्षण क्षण में.. यह तो देवों की धरती है,देवत्व भरा है जड़ जड़ में.....✍️ और अनुसुइया आहिल्या की तो बात अलग ही कर डालो, त्याग उर्मिला का देखो,नारीत्व भरा रामायण में...✍️ यह देवपुरुष हैं स्वर्ण भूम...
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